भारतीय दर्शन में आम-ओ-खास भारतीय को वैकल्पिक विजन देने में बौद्ध दर्शन लम्बे समय से महत्तवपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। पिछले कुछ समय से जब भारत में जाति, धर्म, पंथ के बीच विभेदन बुरी तरह से बढा है, जब समानता और मानवता का मूल भारतीय दर्शन पीड़ित हुआ है; तब बोद्व दर्शन की प्रासंगिकता ज्यादा बढ़ गयी।


साथ डॉ. अम्बेडकर विचार मंच, जयपुर और समग्र समाज सेवा समिति समानता मानवता और बंधुत्व को पोषित करने वाले बौद्ध दर्शन से आम-ओ-खास – भारतीय को वाकिफ कराने के लिए जयपुर में दसवां बौद्ध धम्म सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं।
अखिल भारतीय डॉ. अंबेडकर महात्मा ज्योतिबा फुले साहित्य अकादमी राजस्थान द्वारा आयोजित सम्मेलन के मुख्य संयोजक पूरण सिंह मौर्य ने बताया कि ‘हम चले फुले, अंबेडकर, बुद्ध की ओर’ अभियान के अंतर्गत दसवां बौद्ध धर्म सम्मेलन बहुजन समाज और भारत के सर्व समाज को राष्ट्रीयता की भावना से प्रेरित करने, देश में समता, समानता, भाईचारा, न्याय, स्वतंत्रता की भावना पैदा कर सत्ता में आर्थिक, प्रशासनिक, समान भागीदारी सुनिश्चित करने की ओर अग्रसर करने, सभी धर्म, पंथों, संप्रदायों में प्रेम मोहब्बत से रहने का वातावरण बनाने, सभी महापुरुषों के जीवन चरित साहित्य सृजन करने, संविधान के दायरे में रहकर सभी कर्तव्य दायित्वों का पालन करने, सभी धर्म, पंथ, संप्रदायों में प्रेम और भाईचारा बनाने, बहुजन समाज के महापुरुष जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी के वीरांगनाओं, महापुरुष, संतों की अपेक्षा की गई है।